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बंगाल चुनावी बवाल पर चुनाव आयोग सख्त, 4 पुलिस अफसर सस्पेंड
- Reporter 12
- 05 Apr, 2026
पश्चिम बंगाल में अमित शाह और सुवेंदु अधिकारी के काफिले के पास हुए तनाव और सुरक्षा चूक के मामले में चुनाव आयोग ने बड़ा एक्शन लिया है। कोलकाता पुलिस के चार अधिकारियों को निलंबित करने के साथ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। वहीं मालदा घटना में NIA की जांच भी तेज हो गई है।
कलकत्ता आलम की खबर:कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है और अब चुनावी तनाव पर चुनाव आयोग ने सख्त रुख दिखाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के काफिले के पास हुए हंगामे और सुरक्षा व्यवस्था में कथित चूक के बाद भारत निर्वाचन आयोग ने कोलकाता पुलिस के चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही इन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने को भी कहा गया है। इस फैसले को बंगाल चुनाव के बीच आयोग की बड़ी और सख्त कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन के दौरान वहां राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। इसी दौरान काफिले के आसपास तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जिसके बाद सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे। चुनाव आयोग ने मामले को हल्के में लेने के बजाय सीधे प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम बढ़ाया और पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर कड़ा रुख अपनाया।
आयोग के निर्देश के बाद जिन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है, उनमें एक डिप्टी कमिश्नर रैंक के अधिकारी भी शामिल हैं। इसके अलावा स्थानीय थाने से जुड़े अधिकारी और ड्यूटी पर तैनात अन्य पुलिसकर्मियों को भी निलंबन की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। आयोग ने साफ किया है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यही वजह है कि इस मामले में न सिर्फ तत्काल सस्पेंशन का आदेश दिया गया, बल्कि आगे विभागीय जांच की प्रक्रिया भी शुरू करने को कहा गया है।
इस कार्रवाई के साथ चुनाव आयोग ने राज्य प्रशासन को यह भी निर्देश दिया है कि जिन अहम पदों पर अधिकारी हटाए गए हैं, वहां जल्द नए अधिकारियों की नियुक्ति का प्रस्ताव भेजा जाए। इससे साफ है कि आयोग सिर्फ सजा देने के मोड में नहीं है, बल्कि वह यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक ढांचा कमजोर न पड़े। बंगाल जैसे संवेदनशील चुनावी राज्य में जहां हर राजनीतिक कार्यक्रम और नामांकन तक हाई-वोल्टेज माहौल में बदल जाता है, वहां आयोग की यह तत्परता बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है और अब चुनावी तनाव पर चुनाव आयोग ने सख्त रुख दिखाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के काफिले के पास हुए हंगामे और सुरक्षा व्यवस्था में कथित चूक के बाद भारत निर्वाचन आयोग ने कोलकाता पुलिस के चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही इन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने को भी कहा गया है। इस फैसले को बंगाल चुनाव के बीच आयोग की बड़ी और सख्त कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन के दौरान वहां राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। इसी दौरान काफिले के आसपास तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जिसके बाद सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे। चुनाव आयोग ने मामले को हल्के में लेने के बजाय सीधे प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम बढ़ाया और पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर कड़ा रुख अपनाया।
आयोग के निर्देश के बाद जिन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है, उनमें एक डिप्टी कमिश्नर रैंक के अधिकारी भी शामिल हैं। इसके अलावा स्थानीय थाने से जुड़े अधिकारी और ड्यूटी पर तैनात अन्य पुलिसकर्मियों को भी निलंबन की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। आयोग ने साफ किया है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यही वजह है कि इस मामले में न सिर्फ तत्काल सस्पेंशन का आदेश दिया गया, बल्कि आगे विभागीय जांच की प्रक्रिया भी शुरू करने को कहा गया है।
इस कार्रवाई के साथ चुनाव आयोग ने राज्य प्रशासन को यह भी निर्देश दिया है कि जिन अहम पदों पर अधिकारी हटाए गए हैं, वहां जल्द नए अधिकारियों की नियुक्ति का प्रस्ताव भेजा जाए। इससे साफ है कि आयोग सिर्फ सजा देने के मोड में नहीं है, बल्कि वह यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक ढांचा कमजोर न पड़े। बंगाल जैसे संवेदनशील चुनावी राज्य में जहां हर राजनीतिक कार्यक्रम और नामांकन तक हाई-वोल्टेज माहौल में बदल जाता है, वहां आयोग की यह तत्परता बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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